येवगेनी पेरम्यक की कहानी “दो भाई” एक प्रेरणादायक दृष्टांत है जो दो भाइयों की जीवन की राहों और सोचने के तरीकों पर आधारित है। कहानी में, दोनों भाई एक ही परिवार में पले-बढ़े होते हैं, लेकिन उनके जीवन के प्रति दृष्टिकोण बिल्कुल अलग होते हैं। एक भाई हमेशा अपने स्वार्थ और व्यक्तिगत लाभ के बारे में सोचता है, जबकि दूसरा भाई परोपकारी और दूसरों की मदद करने वाला होता है। जब उन्हें अपनी ज़मीन पर एक पत्थर मिलता है, तो दोनों की प्रतिक्रिया उनके जीवन के सिद्धांतों को उजागर करती है। स्वार्थी भाई पत्थर को बाधा मानकर हटाना चाहता है, जबकि परोपकारी भाई उस पर एक कुआं खोदने का सुझाव देता है ताकि सभी को पानी मिल सके। इस तरह, कहानी यह सिखाती है कि जीवन में निस्वार्थता और परोपकार से न केवल दूसरों का भला होता है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक बदलाव भी आता है।
अनुवादक भीष्म साहनी
Note: The scan has B/W images which are not rendered well.
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