लेव टॉल्स्टॉय की पुनरुत्थान (Resurrection) एक गहन सामाजिक और नैतिक उपन्यास है जो एक युवक की आत्मा के पुनर्जन्म की कहानी को दर्शाता है। यह कहानी मुख्य पात्र, नेख्लुडोव, के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी युवा प्रेमिका, कट्या, के साथ अपने अतीत को फिर से देखने के लिए मजबूर होता है, जब वह उसे एक कैदी के रूप में देखता है।
नेख्लुडोव की यात्रा केवल अपनी पूर्व प्रेमिका के प्रति अपने अपराधबोध को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उसके व्यक्तिगत और आध्यात्मिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। वह अपने जीवन की नैतिक विफलताओं का सामना करता है और समाज के अन्यायों के खिलाफ लड़ने का निर्णय लेता है। उपन्यास में प्रेम, बलिदान, और आत्मिक जागरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पड़ताल की गई है, और यह दर्शाता है कि सच्चा पुनर्जन्म तब संभव है जब व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकारता है और सुधार के लिए प्रयास करता है।
यह उपन्यास एक सामाजिक आलोचना भी है, जिसमें टॉल्स्टॉय ने न्याय प्रणाली, धार्मिकता, और मानवीय संबंधों की जटिलताओं को उजागर किया है। टॉल्स्टॉय के इस काम को उनके जीवन के अंतिम चरण में उनके धार्मिक विचारों के विकास के संदर्भ में भी देखा जाता है।
Note: Scan quality is poor, barely readable at times.
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