रजत राते फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की की एक छोटी लेकिन भावनात्मक कहानी है, जो सेंट पीटर्सबर्ग की चार जादुई रातों में घटित होती है। यह कहानी एक अकेले स्वप्नद्रष्टा की है, जो एक युवा महिला, नास्तेन्का से मिलता है और उससे प्यार करने लगता है। नास्तेन्का पहले से ही किसी और से प्यार करती है और उसी का इंतजार कर रही होती है। स्वप्नद्रष्टा की भावनाएं एकतरफा रह जाती हैं, और जब नास्तेन्का का प्रेमी लौट आता है, तो वह खुशी-खुशी उसके पास चली जाती है, जिससे स्वप्नद्रष्टा फिर से अकेला रह जाता है। यह कहानी अकेलेपन, अधूरे प्रेम और सपनों की दुनिया में खोए रहने की मार्मिक प्रस्तुति है।
मदनलाल मधु द्वारा अनुवादित
Note: Scan quality is poor, barely readable at times.
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क्रम दोस्तोयेव्स्की और ” रजत राते ” ५
“रजत राते” के लिये मिखाईल दोबुजीन्स्की के चित्त
रजत रातें
पहली रात १३
दूसरी रात २८
तीसरी रात ६४
चौथी रात ७५
सुबह ६२
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