“मौजी जीवन” (Весёлая семейка) निकोलाई नोसोव द्वारा लिखी गई एक मज़ेदार और प्रसिद्ध बाल कथा है, जो 1940 के दशक में सोवियत संघ में प्रकाशित हुई थी। यह कहानी दो नटखट और जिज्ञासु स्कूली बच्चों — कोल्या और मिश्का — की है, जो एक किताब पढ़ने के बाद अपने घर में मुर्गियाँ पालने का फैसला करते हैं।
यह प्रयोग धीरे-धीरे एक हास्यपूर्ण झमेले में बदल जाता है — अंडों का टूटना, चूजों की आवाज़ से घर का कोना-कोना गूँजना, पालतू जानवरों की देखभाल में आने वाली मुश्किलें और माता-पिता की चिढ़। फिर भी, इस पूरे अनुभव में बच्चों की सीखने की ललक, दोस्ती और जिम्मेदारी की भावना उभर कर सामने आती है।
नोसोव की लेखनी बच्चों की दुनिया को सहज, हँसमुख और यथार्थ रूप में प्रस्तुत करती है। मौजी जीवन एक ऐसी कहानी है जो बच्चों को न केवल हँसाती है, बल्कि उन्हें कुछ नया करने और गलतियों से सीखने के लिए भी प्रेरित करती है।
