गोर्की और प्रेमचन्द – दो अमर प्रतिभायें – मदनलाला मधु (Gorky And Premchand Two Immortal Talents In Hindi by Madanlal Madhu)

मक्सिम गोर्की (१८६८-१६३६) – रूसी सोवियत लेखक तथा सार्वजनिक कार्यकर्ता साहित्य में समाजवादी यथार्थवाद के जन्मवात) सोवियत लेखक संघ के प्रथम अध्यक्ष ।

प्रेमचन्द (१८८०-१६३६) – हिन्दी-उर्दू स हित्य में यथार्थवादी साहित्य परम्परा प्रवत्र्त्तक । प्रगतिशील लेखक संघ के प्रथ अध्यक्ष ।

“प्रस्तुत ग्रन्थ में दोनों लेखकों की प्रतिभा । उन पक्षों को विद्वत्तापूर्वक उद्घाटित किया गयः है जिनसे अमर साहित्य की रचना होती है।” ( ‘नवभारत टाइम्स’)

“गोर्की और प्रेमचन्द के साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन पहले भी प्रस्तुत किया गया है, पर प्रस्तुत पुस्तक में शायद, पहली बार रूस और भारत की तत्कालीन ऐतिहासिक परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में इन दो महान लेखकों का क्रमबद्ध और बहुमुखी चित्र प्रस्तुत किया गया है।”
(‘कादम्बिनी’)

“प्रस्तुत पुस्तक दो महान लेखकों के कृतित्व के अनेक वर्षीय अनुसंधान का सुफल है। पुस्तक रोचक है और इसको यह रोचकता श्रारंभ से अन्त तक बनी रहती है। सारगर्भित होने के साथ-साथ इसकी अच्छी सज्जा इसे और भी आकर्षक बना देती है।” (‘इंडिया’)

“प्रस्तुत पुस्तक में अच्छी तरह से दिखाया गया है कि सामाजिक और राजनीतिक चेतना की पृष्ठभूमि में दो महान लेखकों के जीवन का कटु अनुभव उनके कृतित्व में कैसे प्रतिबिम्बित हुआ है। गोर्की और प्रेमचन्द के सा- हित्य के अध्ययन और उसे अच्छी तरह समझने की दृष्टि से इस पुस्तक को अवश्य पढ़ा जाना चाहिये।” (‘जनोदय’)

लेखक के बारें में

डा० मदनलाल ‘मधु’ एम०, पिएचडी, कवि, समालोचक, अनुवादक-सम्पादक । पंजाब में लगभग दस वर्ष तक अध्यापन-कार्य, वो वर्ष तक आकाशवाणी जालन्धर से सम्बद्ध । अनेक कविताओं, रेडियो नाटकों, रूपकों, संगीत-रूपकों का सृजन । भारत सरकार के विदेश-मन्त्रालय के चुनाव पर १६५७ से मास्को के प्रगति प्रकाशन और अब रादुगा प्रकाशन में कार्यरत । एक सौ से अधिक विश्व-विख्यात रूसी और सोवियत लेखकों की रचनाओं का अनुवाद-सम्पादन । प्रेमचन्द और गोर्की के साहित्य में विशेष रुचि । महान सर्वहारा लेखक के अनेक नाटकों तथा उपन्यासों-कहानियों का अनुवाद अथवा सम्पादन । गोर्की और प्रेमचन्द के जीवन तथा कृतित्व एवं जीवन-दृष्टिकोणों की सादृश्यता से दोनों पर शोध-कार्य की प्रेरणा । मास्को विश्वविद्यालय के सोवियत साहित्य विभाग द्वारा शोध-प्रबन्ध पर पिएचडी की उपाधि ।

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अनुक्रम

प्रकाशक की ओर से ५
दूसरे संस्करण के बारे में कुछ शब्द ७
एक पुष्प और १०
कड़ियां टूटेंगी २०
नया सूरज २८
वोल्गा और गंगा के तटों पर ४५
युग और चेतना εε
साहित्य और जीवन १४६
सृजन के दर्पण में १५८
गोर्की और प्रेमचन्द २७०

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